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ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर के लिए धूम्रपान को सबसे बड़ा जोखिम कारक माना जाता है। प्रारंभिक अवस्था में ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर का पता लगाया जा सकता है क्योंकि वे मूत्र संबंधी समस्याएं पैदा करते हैं जिन्हें चिकित्सा ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
जब ब्लैडर (मूत्राशय) में कोशिकाएं (सेल्स) अनियंत्रित रूप से विभाजित होने लगती हैं तब ब्लैडर (मूत्राशय) का कैंसर विकसित होता है। ये कैंसर कोशिकाएं (सेल्स) एक ट्यूमर के रुप में विकसित होती हैं, जो समय के साथ शरीर के अन्य भागों में भी फैल सकती हैं। ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर महिलाओं की तुलना में पुरुषों में विकसित होने की अधिक संभावना होती है।
ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर उन बीमारियों में से एक है जिसका जल्द पता लगाया जा सकता है क्योंकि इसके कारण मूत्र में रक्त आने लगता उसके साथ-साथ यह मूत्र संबंधी अन्य कई समस्याओं का कारण बनता है जिसके लिए जल्द से जल्द चिकित्सा की आवश्यकता होती है।
धूम्रपान ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर का प्रमुख कारण है, अनुसंधान से पता चलता है कि धूम्रपान करने वाले लोगों को धूम्रपान न करने वाले लोगों की तुलना में ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर होने की संभावना दो से तीन गुना अधिक होती है।
एचसीजी में भारत के सर्वश्रेष्ठ ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर विशेषज्ञ हैं, जिन्हें विशिष्ट रूप से निर्मित और परिणाम-उन्मुख उपचार योजनाओं के साथ ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर का इलाज करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, जिससे सकारात्मक नैदानिक परिणाम सामने आते हैं।
ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर जिस प्रकार की कोशिकाओं (सेल्स) से उत्पन्न होते हैं, उसके आधार पर ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर को निम्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है :
यूरोथेलियल कार्सिनोमा, जिसे ट्रैन्सिशनल सेल कार्सिनोमा (टीसीसी) के रूप में भी जाना जाता है, ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर के लगभग 90% मामलों में यूरोथेलियल कार्सिनोमा होता है। यह प्रकार युरीनरी ट्रैक्ट (मूत्र मार्ग) के यूरोथेलियल कोशिकाओं (सेल्स) से उत्पन्न होता है।
स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा ब्लैडर (मूत्राशय) की परत से उत्पन्न होता है और लगभग हमेशा तेज़ी से फैलने वाला होता है।
एडेनोकार्सिनोमा, जो ग्लैन्जलर कोशिकाओं (सेल्स) से उत्पन्न होता है, ब्लैडर (मूत्राशय) के सभी कैंसर मामलों में से लगभग 1% एडेनोकार्सिनोमा होता है। लगभग सभी ब्लैडर (मूत्राशय) एडेनोकार्सिनोमा तेज़ी से फैलने वाले होते हैं।
स्मॉल-सेल (लघु-कोशिका) कार्सिनोमा दुर्लभ होता है और सभी ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर के मामलों में से 1% से भी कम मामलों में स्मॉल-सेल (लघु-कोशिका) कार्सिनोमा होता है। यह एक न्यूरोएंडोक्राइन एपिथेलियल ट्यूमर है जिसको अलग करना मुश्किल होता है।
इसे यूरिनरी सार्कोमा भी कहा जाता है, यह दुर्लभ प्रकार ब्लैडर (मूत्राशय) की मांसल कोशिकाओं (सेल्स) से उत्पन्न होता है।
मूत्र रक्तस्राव यह ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर का पहला और सबसे आम लक्षण है। रक्तस्राव के अलावा, कुछ और संकेत और लक्षण हैं जो ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर के विकास को दर्शाते हैं :
एक व्यक्ति को ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर होने का जोखिम कई कारकों की वजह से बढ़ जाता है। निम्नलिखित कुछ सबसे महत्वपूर्ण ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर के जोखिम कारक हैं :
माना जाता है कि ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर के कुल मामलों में से आधे से ज्यादा मामले सिगरेट पीने से होते हैं। धूम्रपान करने वाले जिन लोगों को लंबे समय से यह आदत हैं उन लोगों में ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर का खतरा अधिक होता है।
जैसे जैसे उम्र बढ़ती है ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर होने का खतरा भी बढ़ जाता है। जिन लोगों की उम्र 55 वर्ष से अधिक हैं उनमें से लगभग 90% वयस्कों को ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर प्रभावित करता है ।
धूम्रपान और हानिकारक रसायनों के संपर्क में आने की वजह से, महिलाओं की तुलना में पुरुषों में ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर होने की संभावना अधिक होती है।
किसी करीबी रिश्तेदार को ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर होने का पारिवारिक इतिहास वाले लोगों में इस बीमारी के विकसित होने का जोखिम बढ़ सकता है।
आर्सेनिक, फिनोल, एनिलिन डाई और आरिलमाइन जैसे जहरीले पदार्थों के संपर्क में आने से ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। रंगाई, रबर, एल्यूमीनियम और चमड़ा उद्योगों में काम करने वाले लोगों के साथ-साथ ट्रक चालकों और कीटनाशक लगाने वाले लोगों को ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर होने का खतरा अधिक होता है।
जिन लोगों नें किसी अन्य प्रकार के कैंसर के उपचार के लिए पेल्विक (श्रोणि) क्षेत्र में रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) और कीमोथेरेपी प्राप्त की है उन लोगों को भी ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर होने की संभावना अधिक होती हैं ।
लंबे समय तक चलने वाले दीर्घकालीन संक्रमण और पथरी या बाहरी सामग्री के कारण होने वाली जलन से भी ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर होने की संभावना होती है।
ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर का पता लगाने और निदान के लिए परीक्षण के कई तरीके उपलब्ध हैं। निम्नलिखित कुछ सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर के निदान के तरीके हैं:
एक बुनियादी मूत्र परीक्षण मूत्र में रक्तस्राव की उपस्थिति की पुष्टि कर सकता है, जिससे डॉक्टर अतिरिक्त परीक्षणों की सिफारिश कर सकते हैं। ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर का संदेह होने पर डॉक्टर द्वारा सुझाए गए पहले परीक्षणों में से एक है यूरिन अनालिसिस।
ब्लैडर (मूत्राशय) में किसी भी असामान्य कोशिकाओं (सेल्स) जो ट्यूमर के विकास की ओर इशारा कर रही हो उनको देखने के लिए यूरिन साइटालजी किया जाता है । यह एक बहुत प्रभावी परीक्षण विधि नहीं है क्योंकि इसमें कई प्रारंभिक चरण के ट्यूमर छूट जाते है। इसलिए, निर्णायक निदान के लिए अन्य परीक्षणों के साथ यूरिन साइटालजी की सिफारिश की जाती है।
ब्लैडर (मूत्राशय) ट्यूमर का अल्ट्रासाउंड स्कैन के जरिए भी पता लगाया जा सकता है। यह एक नान-इनवेसिव (बिना चिरफाड वाली) प्रक्रिया है और इसमें कंट्रास्ट माध्यम को इंजेक्ट करने की आवश्यकता नहीं होती है।
एक सीटी स्कैन या एमआरआई ट्यूमर के विकास पर व्यापक जानकारी प्रदान करता है और ब्लैडर (मूत्राशय) में छोटे से छोटे ट्यूमर का भी पता लगा सकता है जो अल्ट्रासाउंड से छूट गए हो।
यह ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर के लिए सिफारिश किए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण नैदानिक तरीकों में से एक है। इस प्रक्रिया के दौरान, कैमरा और प्रकाश स्रोत से लैस एक पतली ट्यूब जैसा ऑप्टिकल उपकरण मूत्रमार्ग के माध्यम से ब्लैडर (मूत्राशय) में डाला जाता है। वीडियो मॉनीटर पर ब्लैडर (मूत्राशय) की आंतरिक सतह दिखाई देती है। छोटे ट्यूमर जिनका अन्य परीक्षणों के दौरान पता नहीं चलता हैं, सिस्टोस्कोपी किए जाने पर आसानी से उनका पता चल जाता हैं।
सिस्टोस्कोपी के दौरान बायोप्सी के लिए नमूना इकठ्ठा किया जा सकता है। असामान्य कोशिकाओं (सेल्स) की उपस्थिति की जांच करने के लिए माइक्रोस्कोप के तहत बायोप्सी नमूने की जांच की जाती है। बायोप्सी से विशेषज्ञों को ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर का निश्चित निदान प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। एचसीजी में, हमारे ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर विशेषज्ञ बेहतर गुणवत्ता के नैदानिक समर्थन और अभिनव उपचार दृष्टिकोण के माध्यम से भारत में सबसे अच्छा ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर उपचार प्रदान करने का प्रयास करते हैं।
ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर का इलाज कई तरह से किया जा सकता है। हालांकि, मरीज़ की कुल स्वास्थ्य स्थिति के साथ-साथ ट्यूमर के चरण, ग्रेड और उसके सटीक स्थान सहित कई मापदंडों के आधार पर उपचार के निर्णय लिए जाते हैं।
सर्जरी ट्यूमर को उसके आसपास के स्वस्थ ऊतकों के एक छोटे हिस्से जिसे मार्जिन कहा जाता है उसके साथ निकाल देती है। ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर के प्रबंधन के लिए विशेषज्ञ कई सर्जिकल तरीकों का उपयोग करते हैं
इस नान-इनवेसिव (बिना चिरफाड वाली) प्रक्रिया के दौरान, सर्जन सिस्टोस्कोप के माध्यम से ब्लैडर (मूत्राशय) में एक इलेक्ट्रिक वायर लूप चलाते है। विद्युत प्रवाह इस वायर से होकर गुजरता है या ट्यूमर को जला देता है। उच्च-ऊर्जा लेजर का भी उपयोग किया जा सकता है। इस उपचार के बाद, कैंसर-मारने वाली दवा का एक बार दिया जाने वाला इंजेक्शन ब्लैडर (मूत्राशय) में दिया जाता है जो बची हुई कैंसर कोशिकाओं (सेल्स) को नष्ट कर देता है ।
यह सर्जरी ब्लैडर (मूत्राशय) को पूरी तरह से (रेडिकल सिस्टक्टोमी) या आंशिक रूप से (पार्शल सिस्टक्टोमी) निकाल सकती है। पुरुषों में ब्लैडर (मूत्राशय), प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथी) और सेमिनल वेसाइकल (वीर्य पुटिकाओं) को निकाल दिया जाता है, जबकि महिलाओं में ब्लैडर (मूत्राशय) , यूटेरस (गर्भाशय), ओवरीज (अंडाशय) और वजाइनल वॉल (योनि की दीवार) का कुछ हिस्सा निकाल दिया जाता है। ब्लैडर (मूत्राशय) को पूरी तरह से निकाल दिए जाने के बाद, मूत्र प्रवाह को मोड़ने, या मूत्र को शरीर से बाहर निकालने के लिए एक नई विधि की आवश्यकता होती है। इन मामलों में नियोब्लैडर रीकन्स्ट्रक्शन (नए मूत्राशय का पुनर्निर्माण) पर विचार किया जा सकता है। इस प्रक्रिया के दौरान, यूरीथ्र (मूत्रमार्ग) को मरीज़ की आंत के एक टुकड़े से बने कोश से जोडा जाता है। यह नियोब्लैडर कार्यक्षमता के मामले में लगभग मूल ब्लैडर के समान होता है।
कीमोथेरेपी कैंसर कोशिकाओं (सेल्स) को मारने के लिए प्रभावशाली दवाओं का इस्तेमाल करती है। ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर का इलाज दो या दो से अधिक कीमो दवाओं के संयोजन से किया जाता है। बची हुई कैंसर कोशिकाओं (सेल्स) को खत्म करने के लिए कीमोथेरेपी इन्ट्रवीनस्ली (नस के माध्यम से) दी जा सकती है, या ब्लैडर (मूत्राशय) की परत से उत्पन्न होने वाले सूपर्फिशल ब्लैडर कैंसर (सतही मूत्राशय कैंसर) का इलाज करने के लिए कीमोथेरेपी सीधे ब्लैडर (मूत्राशय) में दी जा सकती है।
रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) एक्स-रे और प्रोटॉन जैसे तीव्र ऊर्जा बीम का उपयोग करके कैंसर कोशिकाओं (सेल्स) को मार देती है। बेहतर परिणामों के लिए, रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) का कीमोथेरेपी या सर्जरी के संयोजन में उपयोग किया जाता है।
हां, ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर उन कुछ कैंसर में से एक है, जिसका पता शुरुआती चरणों में लगाया जा सकता है, जब इसका इलाज आसानी से हो जाता है। सकारात्मक नैदानिक परिणामों के साथ प्रारंभिक से लेकर उन्नत चरण के ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर के उपचार और प्रबंधन के लिए कई उपचार दृष्टिकोण हैं।
अपने ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर के उपचार के बाद जीवित रहने वाले लोगों को सामान्य जीवन में वापस नहीं लौटने की चिंता सताना कोई असामान्य बात नहीं है। ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर चुनौतीपूर्ण हो सकता है, फिर भी नियमित गतिविधियों पर वापस लौटना और सामान्य जीवन जीना संभव है। हालांकि, अपने कैंसर उपचार के बाद जीवित रहने वाले लोगों को अपने डॉक्टरों के साथ अपनी फालो अप अपॉइंटमेंट को जारी रखने और अपनी विशेषज्ञ टीम की सिफारिशों का पालन करने की आवश्यकता होती है।
धूम्रपान ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर के लिए सबसे बड़े जोखिम कारकों में से एक है, और यह ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर के खतरे को तीन गुना बढ़ा देता है। इसलिए हां, धूम्रपान छोड़ने से ब्लैडर (मूत्राशय) के कैंसर का खतरा कम हो सकता है।
नहीं, ब्लैडर (मूत्राशय) को निकालना ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर का एकमात्र उपचार विकल्प नहीं है। ट्यूमर का चरण और ग्रेड, इसका आकार, ट्यूमर का सटीक स्थान और मरीज़ की कुल स्वास्थ्य स्थिति जैसे कई कारकों के आधार पर उपचार योजना बनाई जाती है । शुरुआती चरणों में, केवल ट्यूमर और उसके आसपास के स्वस्थ ऊतकों का एक छोटा सा हिस्सा निकाल दिया जाता है। पुनरावृत्ति के जोखिम को कम करने के लिए सर्जरी के बाद कीमोथेरेपी की सिफारिश की जा सकती है।
उन्नत चरणों में, मरीज़ों के जीवित रहने की दर में सुधार के लिए ब्लैडर (मूत्राशय) को निकालने की सिफारिश की जा सकती है। ब्लैडर (मूत्राशय) को निकालने के बाद नियोब्लैडर रीकन्स्ट्रक्शन (नए मूत्राशय का पुनर्निर्माण) किया जा सकता है, जिसमें कोश बनाने के लिए मरीज़ की आंत का एक हिस्सा निकाला जाता है और इसे युरीथ्र (मूत्रमार्ग) से जोडा जाता है। नियोब्लैडर आपके मूल ब्लैडर (मूत्राशय) के जैसे ही काम करता है।